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रविवार, 17 अगस्त 2014

positive approach - personal development and motivational article in Hindi



सकारात्मक दृष्टिकोण 
Jessica Cox
Positive Approach

एक व्यक्ति की life में सफलता और असफलता का प्रतिशत उस व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है वह किसी व्यक्ति, वस्तु परिस्थिति विशेष को किस दृष्टिकोण से देखता हैpositive or negative Approach  

एक व्यक्ति की positive approach, उसे अपनी life में वो सब को दिला देती  है जिसे वो पाना चाहता है, चाहे उसको पाना कितना ही कठिन नामुमकिन क्यों हो सकारात्मक दृष्टिकोण उस तक पहुचने का रास्ता ढूंढ ही निकालता है

वहीं पर negative approach व्यक्ति को उन सब चीजों रास्तों से दूर ले जाती है जो उसके साथ होती हैं और जो उसे success तक पहुंचा सकती थी

सकारात्मक दृष्टिकोण हमें हर कठिन से कठिन परिस्थितियों से उबरने की ability caliber प्रदान करता है

सकारात्मक दृष्टिकोण आपकी desire sucess को पाने की ओर आपका पहला कदम है जो आप को हर उस अगले कदम तक पहुंचता है जो आप की इच्छित मंजिल का अंतिम कदम होता है

Cricket Player Yuvraj Singh का example ही लेते हैंहम सभी जानते है की कुछ समय पहले वो cancer disease से जूझ रहे थे

युवराज सिंह को जब पता चला की उनको cancer हुआ है तब क्या उनने अपने जीवन से हार मानी थी, गर उन्होंने अपने दृष्टिकोण को नकारात्मक रख कर ये सोच होता की अब सब ख़तम हो गया, तो जो युवराज सिंह आज हमे cricket की field पर नजर आते है क्या वो सकते थे ? no never, पर वो अपने जीवन की सबसे मन पसंद cricket - field पर वापस आये और चौके - छक्के भी लगाये ये सब कैसे हुआ एक लाइलाज बीमारी से उठकर, मृत्यु की जंग को जीत कर, जीवन के मैदान पर एक सामान्य पर अद्भुत जीवन जीने वाले युवराज ये सब सिर्फ अपने सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण ही कर पाए... क्या ये इस के बिना संभव था ???? नहीं... its not possible without positive thinking.

“Positive thoughts always give you power and open the all way of lights and negative thoughts close the all possible way.”    
        
एक सकारात्मक सोच व्यक्ति के देखने के हर नजरिये को बदल देती है... सकारात्मक दृष्टिकोण वाला कीचड़ में भी कमल को खिलता देख खुश होता है और नकारात्मक दृष्टिकोण वाला चाँद में भी दाग देखता है और अपने मन को उदासी से भर लेता है

अत: दृष्टिकोण बदलिए और खुश रहिये उन्नतिशील बनिए

Good Luck!       


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शनिवार, 19 अप्रैल 2014

6 Motivational thoughts for success in professional and student life in Hindi


6 Motivational thoughts for success 
in professional and student life



Ø महान कार्य करने के लिए सबसे पहली जरुरी चीज व्यक्ति का “आत्मविश्वास ” है  
-    सैमुअल जॉनसन

Ø कल्पना करना सृजन का आरंभ है  आप उसकी कल्पना करें जो आप चाहते हैं , आप जो कल्पना करें उसी की इच्छा करें और अंत में आप उसी का सृजन करेंगे जिसकी आप इच्छा कर रहें हैं  
-    जॉर्ज बर्नार्ड शा

Ø उठो ! जागो ! और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको  
-    स्वामी विवेकानंद

Ø अपने राह की कठिनाइयाँ हमें तभी दिखाई देती हैं, जब हमारी आखें अपने लक्ष्य से हट जाती हैं  
-    हेनरी फोर्ड

Ø मुझे देरी होने की वजह के बहाने जानने में रूचि नहीं है  मुझे रूचि है कार्य संपन्न होने में  
-    जवाहरलाल नेहरु

Ø पीठ पीछे काम बिगाड़ने वाले और सामने मीठा बोलने वाले मित्र का उस घड़े की तरह त्याग कर देना चाहिए, जिसके मुंह पर घी लगा हुआ हो और अंदर विष भरा हो  
-    चाणक्य निति



One Request-
  महान सफल व्यक्तियों के द्वारा कहे व उनकी विभिन्न पुस्तकों में प्रकाशित ये motivated thoughts and inspirational quotes का collection Hindi में आप को कैसा लगा? क्या ये आप के जीवन में उपयोगी है ? Please हमें ये comment के द्वरा जरुर बताने का कष्ट करें, और गर पसंद आये हो तो इनको share भी करें.. जिससे महापुरषों के जीवन-उपयोगी इन सुविचारों कि खोज जारी रहे, और आप सब तक पहुँचती रहे।

अंत में आप सब readers को मेरा धन्यवाद!


शनिवार, 12 अप्रैल 2014

Teacher, Student and True learning- inspirational article in Hindi - शिक्षक, शिष्य व सच्ची शिक्षा



शिक्षक, शिष्य व सच्ची शिक्षा

true learning

Teacher, Student and true learning

ऋषि धौम्य का सुरम्य ashram था । यहाँ ऋषि धौम्य अनेको लोगों को शिक्षा का ज्ञान- दान देते थे । अनेकों students यहाँ पढ़ते थे । ऋषि धौम्य एक श्रेष्ठ teacher थे, वे पूरी लगन और श्रद्धा से अपने सभी शिष्यों को पढ़ाते थे, बिना किसी भेद - भाव के । वो कभी राजा के बेटे और साधारण किसान के बेटे में कोई भेद नहीं करते थे । सब को एक समान ही ज्ञान का दान मिलता था ।

ऋषि धौम्य हमेशा ये ध्यान रखते थे, की उनके सभी शिष्यों में सद्गुणों की वृद्धि हो रही है या नहीं, इसके लिए वो अपने सभी students की time to time परीक्षा भी लेते रहते थे ।

एक दिन मूसलाधार वर्षा हो रही थी । ऐसे में ऋषि धौम्य ने अपने एक बहुत ही होनहार शिष्य आरुणी की परीक्षा लेने की सोची ।

उन्होंने आरुणी को अपने पास बुलाया और कहा –“ बेटा ! तेज बारिश के कारण पास वाले खेत की मेंड़ टूट गयी है, जिसके कारण खेत का पानी बाहर निकला जा रहा है। तुम जाकर मेंड़ बांध आओ ।”

आरुणी तत्काल ही उठा और बोला –“ जैसी आज्ञा प्रभु की ! मैं खेत पर चलता हूँ, कह वह खेत पर चल दिया ।”

आरुणी मेंड़ बनाने लगा, पर water का बहाव बहुत तेज था । इस कारण मेंड़ बार – बार टूट जा रही थी । आरुणी से water रुक नहीं पा रहा था । जब किसी भी उपाय से पानी न रुका तो यह देख आरुणी उस स्थान पर स्वयं लेट गया । इस प्रकार पानी को खेत के बाहर जाने से रोक लिया ।

आरुणी पूरी night ऐसे ही मेंड़ पर लेटा रहा, जिससे पानी रुका रहे ।

true student true teacher and true learning 

इधर बहुत रात्रि बीत जाने पर भी जब आरुणी ashram नहीं लौटा तो ऋषि धौम्य को उसकी चिंता हुई और वे खेत पर उसे ढूंढने पहुँचे । खेत पर जा कर उन्होंने देखा तो आरुणी पानी को रोके मेड़ के पास पड़ा है ।

यह देखते ही ऋषि धौम्य की छाती अपने शिष्य के लिए भर आयी । उन्होंने आरुणी को उठाकर अपने गले से लगा लिया ।

ऋषि धौम्य अपने शिष्य के ऐसे समर्पण पर गर्वान्वित हो उठे ।
            
Friends, सच्ची शिक्षा सिर्फ अक्षर ज्ञान कराने से ही पूर्ण नहीं होती बल्कि सच्ची शिक्षा तो शिष्यों में सद्गुणों को समावेश करने से होती है

सच्ची शिक्षा बड़ी – बड़ी degree लेने व दिलाने में , बड़े –बड़े ग्रन्थों को रटने व रटाने में नहीं है, सच्ची शिक्षा तो व्यक्ति के जीवन में सद्गुणों के बीज रोपित करने व उनको सीचने नें है । सद्गुणों से पूर्ण श्रेष्ठ व्यक्तित्व के निर्माण में है ।  
  
पर friends,  आज – कल हमारा education sector बहुत ही commercial हो गया है । आज तो शिक्षा पूर्णत: व्यवसाय बन गयी है । जहाँ पहले teacher शिक्षा का दान देना सबसे बड़ा पुन्य का कार्य समझते थे और student योग्य teacher की तलाश में अपना घर बार छोड़ दूर सुदूर में बसे आश्रमों में शिक्षा प्राप्ति के लिए जाते थे । तब teacher भी योग students के इन्तजार में रहते थे जिन्हें वे अपना पूरा अर्जित ज्ञान प्रदान कर सकें । और इस शिक्षा दान के बदले जो गुरु दक्षिणा मिल जाती थी उसे वो सहर्ष स्वीकार कर लेते थे और students भी अपने teacher की माँगी दक्षिणा हर – हाल में अपना जीवन अर्पण कर देते थे । दोनों लोगों के बीच पूर्ण समर्पण के भाव होते थे... गुरु शिष्य को सब कुछ अपना सिखा देने को आकुल और शिष्य सब कुछ सीख लेने को तत्पर । पर आज.... कहाँ गयी ऐसी शिक्षा प्रणाली जो सद्गुणों की खान जैसे शिष्य बना सके... ?

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Friend’s, आप को मेरी, “ teacher, Students and true learning " motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personalty) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये ।