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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

Don’t say you don’t have enough time- A personal development article in Hindi



Don’t say you don’t have enough time


हम सब को God की तरफ से एक दिन में एक सा, एक ही वक्त दिया है- पूरे 24 hours. yes friends, हम सब अक्सर ये कहते रहते हैं कि हमारे पास समय ही नहीं है नहीं तो मैं ये करता, वो करता, पर क्या करे हमारे पास तो समय ही नहीं बचता जो हम अपनी life में कुछ अलग कर सकें । पता नहीं लोग कैसे कर लेते हैं। हम भी अपनी country और इस society के लिए कुछ करना तो चाहते हैं..पर...!!!  God पर blame डाल देते हैं.. एक तो हमारे पास time नहीं दूसरे कुछ अलग करना हमारे जैसे साधारण लोगों का काम ही नहीं.. इसके लिए तो विरला होना पड़ता है जो God ने हमें बनाया ही नहीं।

friends, Don’t say you don’t have enough time. आप सब के पास भी श्री राम शर्मा आचार्य, मदर टेरेसा, महात्मा गाँधी, अल्बर्ट आइंस्टीन, बराक ओबामा, और डॉ राजेंद्र प्रसाद और सभी बड़े – बड़े काम करने वालों के जीवन में God ने every day, केवल 24 hours ही दिए थे । और इन लोगों ने इन 24 hours का ही सही तरीके से अपनी life में समायोजन कर सदुपयोग कर वो कार्य किये जिसे हम लोग नहीं कर पाते और कहते हैं कि ये कार्य तो साधारण लोगों के बस कि बात नहीं इसे तो विरले लोग ही कर सकते हैं ।

पर ऐसा नहीं है ये कार्य हम सभी लोग कर सकते हैं बस जरूरत है तो केवल जागरूकता की अपने समय के प्रति, अपनी क्षमताओं के प्रति। गर हम अपनी क्षमताओं को जानते हुए, अपने जीवन लक्ष्य का सही निर्धारण करते हुए, अपने समय का सदुपयोग करते हैं तो हम सब भी अपने जीवन में वो कार्य कर सकते हैं जिन्हें हम असाधारण कहते हैं और मानते हैं कि ये कार्य महान और विरले लोग ही कर सकते हैं ।

God ने हम सभी को एक समान ही अवसर दिए हैं किसी को कम या ज्यादा नहीं क्योकि God किसी के साथ भी अन्याय नहीं करता उसकी दृष्टि में तो हम सब एक समान ही हैं बस जरूरत है तो हमें स्वयं को पहचान ने की और अपने पास मौजूद साधनों के सही दिशा में उपयोग की । जब हम ऐसा करने लगेगें तो हमारे यही 24 hours हमारे लिए पर्याप्त हो जायेंगे और हम भी इतने ही समय में वो कर सकेगें जो दूसरे महान लोगों ने किये थे और अपना नाम history में लिखवा गये।

So friends, if you want to become a successes full position in your life, then don’t say, you don’t have enough time.
       

          
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शनिवार, 21 सितंबर 2013

Why do we shed themselves(-हम क्यों स्वयं को गिराते है)- A Inspirational and motivational story in Hindi


हम क्यों स्वयं को गिराते है

आज के परिवेश को देख कर मन में बड़ी पीड़ा हो रही है मन बार - बार यही प्रश्न करता है कि हम क्यों स्वयं को गिराते है । आज हर व्यक्ति चाहे वो साधारण इंसान कहलाने वाला एक किसान या मजदूर हो या फिर एक उच्च वर्ग को सम्बोधित करने वाला एक प्रतिष्ठित business men या कोई नेता या फिर यूँ कहे अपने समाज को चलाने वाले धर्म guru धर्माचार्य सब के सब आचरण और व्यवहार से निम्न श्रेणी में आ खड़े हुए हैं ।
आज अपने को सभ्य और अनुकरणीय मानने वाले लोगों का ही जीवन छलावे से भरा – पूरा है ये आज समाज में रह कर समाज को उसी प्रकार लुट रहे हैं जैसे दीमक लकड़ी में रह कर लकड़ी को खोखला करती है।
ऐसे ही आज साधु के वेश में समाज को लूटने वाले ये समाज के पुरोधा अपने ही समाज जिसको वो अपना परिवार कहते हैं उसे लुटेरों कि तरह लुट रहें हैं । हमारे देश पर न जाने कितनी बार लुटेरों ने हमला किया और उसे लूटा पर जिस तरह आज अपना देश लुट रहा है अपने ही देश के रक्षकों से उस तरह तो अपना देश कभी नहीं लुटा।
कभी कभी मेरे दिल में ये ख्याल आता है कि ये ऐसा क्यों करते हैं कहाँ है इस की जड़ें... कोण से पेड़ इन को चाय देते आहे जो ये इतने पनप रहें है की इनकी आत्मा को जरा सा भी खोफ कानून का या परमात्मा का नहीं है कि इनको भी कभी दंड मिलेगा । इनको दुराचरण में आनंद और सदा चरण में दुःख कि अनुभूति इसीलिए होती है कि ये जानते है कि इन्हें इनके कर्मों का दंड नहीं मिलेगा। जनता- समाज को इन लोगों ने अपने मोह- पाश में जो बाँध रखा है ।
इस सृष्टि कि रचना करने वाले राजा कि सबसे बड़ी संतान कहलाने वाले हम मानव है और मानव को उसके इस साम्राज्य का राजकुमार माना जाता है। मानव के मजबूत कंधे पर ही इस सृष्टि के संचालन करने की शक्ति है, फिर इस शक्ति का उपयोग सबके हित में करने कि बजाय थोड़े से स्वार्थ हित और छडिक सुख के लिए मानव दुराचारी बन कर स्वयं को क्यों गिरता है।
सदाचारी जीवन सदैव उन्नति का दौतक है इसके दवारा ही समाज में श्रेष्ठ प्रतिको कि स्थापना हो सकती है; जिससे इस समाज और समाज में रहने वाले हर स्त्री – पुरुष अपने को सुरक्षित कर सकते है और साथ ही उन्नति व प्रगति की नयी राहे बना सकते हैं।
एक गलत कार्य करने वाला  ये सोचता है कि उसे कोई जन नहीं पायेगा, समाज या कानून भी उनको सजा नहीं दे पायेगा क्यों कि वो ऐसा अपने आस पास आवरण तैयार रखते है जिससे वो बाख जायेंगे और ये सच भी है की वो बच जाते है ;पर क्या वो God की नजर से बाख पायेंगे या अपनी अंतर आत्मा से। एक दुराचारी आत्मग्लानी की पीड़ा से पीड़ित एवं उद्धेलित रहता है। वही पर एक सदाचारी का जीवन सदैव आत्म संतोष से सराबोर रहता है ।
गर हम अपने समाज को पतन से व अपराध से मुक्त करना चाहते हैं तो हमे अपने समाज में श्रेष्ठ विचारों व व्यवहार का आचरण उतरना होगा। एक सदाचारी का जीवन सदैव आत्म संतोष से सराबोर रहता है । केवल पीले, सफ़ेद व गेहुए वस्त्र पहनकर समाज को ठगना नहीं है बल्कि सही मायने में स्वेत - स्वच्छ, निर्मल विचारों को सबके हृदय में देव मूर्ति कि तरह स्थापित करना होगा तभी हम अपने समाज को गिरने से बचा सकते है और गर्व से कह सकते है की हम उस देश के वासी हैं जहाँ कभी राम का राज्य था । हम में मर्यादा है । सदाचरण है। हम उन्नत विश्व के रचना कार है । हम भारत के वासी हैं ।     
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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

Ten rules to becoming successful and popular-( सफल और लोकप्रिय बनने के दस नियम)- A article for personality development


सफल और लोकप्रिय बनने के दस नियम

Ten rules to becoming successful and popular 

सफलता एक ऐसा शब्द है जिसे अपने जीवन से हर व्यक्ति जोड़ना चाहता है । पर क्या जितनी आसानी से हम ये चाहते है उसी आसानी से ही सफलता हमे मिल जाती है ?

नहीं, friends ये इतना आसान नहीं है अपर असंभव भी नहीं है हाँ थोड़ा कठिन जरुर है क्योंकि सफलता की चोटी तक पहुचने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है और continuously लगे रहना पड़ता है । जब तक desire success मिल नहीं जाती।

क्या कभी आप ने सोचा है कि सफल लोगों के पास success और लोकप्रिय बनने की ऐसी कौन सी key होती है ? जिससे वो अपने जीवन की peek success को प्राप्त करते है।

Friends, सफल लोगों के पास लोकप्रिय व सफल बनने कि योजना होती है । जो लोग चोटी पे पहुचते हैं वे इस बारे में ज्यादा सोचते है कि वे वो ऐसी कौन सी Technic अपनाएँ जो लोग उनसे प्रभावित हो और वो उन लोगों के बीच अपनी पहचान बनाएं ।

आप लोगों को ये जानकर surprise होगा कि सफल व महान व्यक्तियों के पास लोगों को प्रभावित करने कि एक स्पष्ठ, निर्धरित योजना होती है जिसका वो नियमित follow करते हैं, अपनी सफलता को पाने के लिए और उसे हमेशा  बनाये रखने के लिए।

आज मैं यहाँ पे president लिंडन जॉन्सन के दस सूत्रीय कार्यक्रम के बारे में बात करने जा रही हूँ जिसको उन्होंने अपने president बनने से पहले तैयार किया था। इतिहास गवाह है कि उन्होंने इन rules को हमेशा अपने जीवन में उतारा और बुलंदियों को छुआ । इन rules का जिक्र मशहूर लेखक David J. Schwartz ने अपनी book “बड़ी सोच का जादू” में किया है । 
ये rules इस प्रकार हैं:-  
         
  1. एक ऐसा हँसमुख व्यक्ति बनिए, जिसके साथ होने पर कोई तनाव में ना रहे।  
  2. अपने मष्तिष्क को शांत रखने कि आदत डालिए ताकि कठिन परिस्थितियों में आप उत्तेजित या परेशान ना हो पाएं। और सही निर्णय ले सकें ।
  3. नाम याद रखने कि आदत डाले । अगर आप ऐसा नहीं करते है तो सामने वाले को यह लग सकता है कि आपकी उनमे रूचि नहीं है।
  4. बड- बोल मत बोलिए। अर्थात ऐसी बड़ी बड़ी बाते मत बोलिए जिससे आप का ही रोब झलके। सामने वाले को यह एहसास न होने दें कि आप खुद को ही सर्व ज्ञानी समझते हैं और सामने वाला आप के समक्ष कुछ भी नहीं है।
  5. अपने आप को दिलचस्प बनाइये जिससे लोग आप का साथ पसंद करें। आप के आस पास रहना चाहें।
  6. आप अपने जीवन और व्यवहार से ऐसे तत्वों को निकल दीजिये जो आप के  जीवन में दुःख का कारण बने या यूँ कहें कि ऐसे तत्वों को निकाल दे जो आप के व्यक्तित्व में चुभते हों ।
  7. विशुद्ध भावनावों के साथ हर miss understanding को दूर करने की पूरी कोशिश करें और जल्द से जल्द शिकायतों को नाली में बहा दें।
  8. लोगों को पसंद करने की आदत डालें। और कुछ समय बाद आप सचमुच उन्हें पसंद करने लगेंगे ।    
  9. हमेशा लोगों कि सफलता व उनकी उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देने का मौका मत गवाइए । औए ना ही किसी के दुःख या उनकी निराशा में अपनी संवेदना जताने का अवसर खोइए।  
  10. हर पल लोगों की help करने के लिए तैयार रहिये।  लोगों को आध्यात्मिक शक्ति दीजिये और वे आप को पसंद करने लगेंगे।  


इन ten आसान परन्तु बेहद प्रभावी नियमों कि वजह से president जॉन्सन को मतदाताओं ने पसंद किया और वो एक साधारण व्यक्ति से America के president बनें।  




बुधवार, 18 सितंबर 2013

Pleasure and pain - just one attitude- A personality development article in Hindi-सुख और दुःख – केवल एक दृष्टिकोण


सुख और दुःख – केवल एक दृष्टिकोण

friends गर आप से कहा जाये कि भगवान की एक दुकान पर सुख और एक दुकान पर दुःख मिल रहा है और आप को इनमे से एक को खरीदना है । तो आप क्या खरीदेंगे.. ? किस दुकान पर जायेंगे..?
i know आप का answer होगा सुख, obesity दुःख तो कोई लेना ही नहीं  चाहेगा । ऐसा क्या है जो हम सब दुःख के नाम से ही कॉप जाते है । सुख की कल्पना मात्र से भावविभोर हो जाते हैं ।

जीवन में सुख और दुःख की परिभाषा क्या है यह कहना बहुत कठिन है, क्योंकि जो आपके लिए सुख का कारण बनता है वही कारण किसी और के जीवन में दुःख का एहसास कराती है। ऐसा इसलिए क्योकि सुख और दुःख तो केवल एक दृष्टिकोण मात्र हैं । जिसकी दृष्टि जैसी होगी उसके जीवन में हर पल हर घटना उसे उसी के अनुरूप सुख या दुःख में से किसी एक का अनुभव करायेगी।

सूरज का प्रकाश, उसका तेज, उसकी सुनहरी धूप प्रात: काल में तो सुख का अनुभव कराती है वही पर दोपहर की तेज, चिलमिलाती धूप कष्टदायक होती है और दुःख का एहसास कराती है । सूरज कि तेज किरणें गर्मी में दुःख और ठण्ड में सुख का एहसास कराती है । यानि कि सूरज तो एक ही है पर वो कभी किसी के लिए आनंद का कारण बनता है तो कभी दुःख का दाता बन जाता है पर सूरज तो एक ही है ना अर्थात हमारा दृष्टिकोण ही है जो सुख और दुःख का अनुभव करता है ।

तो क्या आप अब मेरी बात से सहमत है कि सुख और दुःख- केवल एक दृष्टिकोण है.. अभी नहीं O.K. मैं अपनी बात एक और सन्दर्भ से आप के सामने रखती हूँ ।
भोजन को ही लीजिये! एक व्यक्ति को दो दिन से भोजन ना मिला हो और उसे तेज खूब भूख लगी हो, फिर उसे कही से दो सूखी रोटी खाने को मिल जाएँ । तो उस व्यक्ति को वो रोटी खा कर जिस सुख की अनुभूति होगी वो उसे कीमती सोने चाँदी के ढेर से भी नहीं होगी ।  वहीँ पे एक बीमार व्यक्ति या ऐसा व्यक्ति जिसे  भूख ना हो उसका पेट बहुत भरा हो और उसके के सामने बहुत ही स्वादिष्ट व rich food खाने को रखा हो। उसे खाने कि इच्छा उसे ना हो, या चाह कर भी खाने में असमर्थ हो तो वो भोजन उसे कष्ट प्रद लगेगा, और उस व्यक्ति को दुःख कि अनुभूति होगी कि वो इतना सवादिष्ट food नहीं खा पा रहा। 

एक व्यक्ति के  सामने भोजन आता है तो वह आनंदित होता है और उसे सुख कि अनुभूति होती है वही पर जब दूसरे व्यक्ति के सामने food आता है तो उसे दुःख कि अनुभूति होती है। 
        
अब आप ही बताइए सुख और दुःख क्या है..? एक दृष्टिकोण या फिर...!!!



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बुधवार, 11 सितंबर 2013

Six formulas to get long life in Hindi


Six formulas to get long life

six formula to get long life

दीर्घ जीवन पाने के 6 सूत्र

दीर्घ और स्वस्थ जीवन को पाने कि चाह तो सभी को होती है फिर वो चाहे राजा हो या रंक । पर ये चाह हर किसी कि पूर्ण नहीं हो पाती कारण हमारा खुद पर नियंत्रण ना होना ।

आज में आप लोगों के बीच एक healthy और long life कैसे जियें ? इस के कुछ स्वर्णिम सूत्र बताने जा रही हूँ । अगर आप इन सूत्रों का पालन करते हैं तो आप भी मेरी दादी माँ जैसे लम्बी आयु जी सकते हैं.. मेरी दादी जी इस समय 91 years का जीवन बड़े आनंद के साथ जी रही हैं । उन्होंने अपने जीवन में इन सूत्रों का पालन जो किया है.. और उनको विश्वास है कि जो इन सूत्रों का पालन करेगा वो भी स्वस्थ और निरोग जीवन दीर्घ काल तक जी पायेगा ।   
ये अनमोल सूत्र इस प्रकार हैं —

  • खुद को चिंता से सदा दूर रखें । चिंता से जितना हो सके दूर रहिये क्योंकि चिंता चिता है । अर्थात चिंता चिता कि तरह होती है, जो मन कि सारी  प्रसन्नताओं को नष्ट कर देती है और गर आप स्वयं में खुश नहीं रहेंगे तो स्वस्थ कैसे रह पायेंगे ।   
  • मन में सदा यह विश्वास रखिये कि हमें अल्पायु में कभी भी मृत्यु नहीं आ सकती । और मन में यह विश्वास रखिये कि आप को एक लम्बा और स्वस्थ जीवन हर हाल में जीना है ।
  • हमेशा यह विश्वास रखिये कि आप स्वस्थ हैं निरोग हैं, कभी भी रोग की आशंका को मन में घर मत बनाने दीजिये ।

get long life

  •   नित्य – नियमित रूप से अपनी life में प्राणायाम, आसन, व्यायाम और योग को समय दीजिये । प्रतिदिन थोड़ा व्यायाम व योग करिये। टहलने का अभ्यास करिये । प्रतिदिन थोड़ा टहलिए। नंगे पैरों हरी घास पर टहलना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है ।
  • खान-पान संतुलित और नियमित हो । शरीर कि आवश्यकता से अधिक भी ना खाएं और आवश्यकता से कम भी भोजन ना करें । दोनों ही अवस्था हानिकारक हैं । भोजन पौष्टिक हो, स्वादिष्ट व राजसिक नहीं ।
  • प्रसन्नता और शांति पूर्ण वातावरण में रहने से दीर्घायु मिलती है, इसलिए हमेशा अपने आस – पास ऐसा ही वातावरण बनायें रखें और ऐसे ही स्थानों पर रहें ।

           
Friends, गर आप ऊपर बताये गये six formulas to get long life को अपनी life का part बनाते हैं तो आपकी health में positive changes जरूर होंगे

 
Request-  
मेरा ये health article “Six formulas to get long lifeआप को कैसा लगा? क्या ये आप के जीवन में उपयोगी है ? please हमें ये comment के द्वरा जरुर बताने का कष्ट करें, और गर पसंद आये हो तो इनको share भी करें..                            
और अंत में, इस blog पर पधारने के लिए आप सब readers को मेरा सादर धन्यवाद!    
 

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शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

Who is more important - spirit, mind or body?- it is a inspirational thoughts in Hindi-(किसका महत्व ज्यादा- भावना, बुद्धि या शरीर ?)


किसका महत्व ज्यादा- भावना, बुद्धि या शरीर ?

spirit, mind, or body

एक बार भावना, बुद्धि और शरीर तीनो आपस में मस्ती मजाक कर रहे थे , और हँसी मजाक करते- करते अचानक उनमें आपस में बहस छिड़ गयी कि उनमें कौन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है ? शरीर ने कहा- “ मैं मनुष्य के अस्तित्व का प्रतीक हूँ । मुझ से ही मनुष्य कि पहचान होती है । यदी मैं न होता तो मनुष्य अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं कर पता और ना ही अपनी भावनाओं को प्रकट कर पाता । मेरे ही माध्यम से आप दोनों स्वयं को दुनिया के सामने प्रकट कर पाते हो मेरे बिना आप दोनों का कोई अस्तित्व ही नहीं है इसलिए मैं आप दोनों से ज्यादा महत्वपूर्ण हूँ ।“

इस पर बुद्धि बोली - “ मेरे ना होने से मनुष्य पुर्णतः बेकार हो जायेगा उसका जीवन जीव- जंतु व जानवरों से जरा सा भी भिन्न नहीं होगा । उसके आचरण और जानवरों के आचरण में कोई अंतर नहीं होगा । मनुष्य ने जो भी प्रगति कि है मेरे कारण कि है मेरे बीबा वह विकास के साधन नहीं बना सकता मेरे बिना तो विकास ही असंभव है। मेरे अस्तित्व से ही मनुष्य का विकास संभव है मेरे बिना ये सब मूल्य हीन है ।”

शरीर और बुद्धि कि बातों को सुन कर भावना बोली –“ मनुष्य के जीवन में संस्कार, समृद्धि, विकास और सुंदरता ये सब भावनावों के कारण हैं । भावनाओं के आभाव में मनुष्य और जड़ पदार्थों ( ईट – पत्थर) में क्या अंतर रह जायेगा ? इसलिए आप सब में मैं ही सब से ज्यादा महत्वपूर्ण हूँ।"

शरीर, बुद्धि और भावना के इस वार्त्तालाप को छीर – सागर में बैठे सच्चिदानंद God Vishnu सुन रहे थे । प्रभु सम्पूर्ण वार्त्तालाप को सुन कर मुस्कुरा उठे और उन तीनों से बोले –“ मनुष्य का जीवन तुम तीनों के बिना अधूरा है । तुम तीनों के कारण ही मनुष्य जीवन बहुमूल्य बनता है । तुम में से किसी एक के भी ना होने से उस के जीवन में असंतुल आ जाएगा । वो अपना न तो विकास कर पायेगा न अपने अस्तित्व का बरकरार रख पायेगा । मैंने मनुष्य को अतुल्य शरीर, प्रखर और असीम बुद्धि, और अनंत भावनाएँ दी हैं । जिससे वह तुम सब में  समुचित संतुलन बना कर, तुम तीनों का अपने जीवन में समग्र व उचित उपयोग कर अपने जीवन को उन्नत कर सके । तुम तीनों ही उसे जीवन में वरदान हो ।”


Friend’s, आप को मेरी, “किसका महत्व ज्यादा- भावना, बुद्धि या शरीर?” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personalty) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये ।   


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शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

The base of success – The only goal setting



सफलता  का आधार- एक ही लक्ष्य का निर्धारण



                
एक युवा हो रहे किशोर ने एक rich man का ठाठ-बांट देखा और उससे inspire हो उसने सोचा कि मुझे भी इस व्यक्ति कि तरह धनवान बनना चाहिए,

फिर ये सोच कर, वह कई दिन तक उसी rich man कि तरह कमाई करने का प्रयास किया, और कुछ paise भी कमा लिए,

पर इसी बीच उसकी भेंट एक विद्वान पुरुष से हुई, वह किशोर विद्वान कि वाक्पटुता से प्रभावित हो कर कमाई करना छोड़ दिया और विद्वान बनने के लिए पढ़ने में लग गया, अभी वह थोड़ा-बहुत ही सीख पाया था कि उसकी भेंट एक संगीतज्ञ से हो गई, उस संगीतज्ञ से मिल कर उसे संगीत में अधिक आकर्षण लगा, उस दिन से उसने study बंद कर दी, और music  सीखना आरम्भ कर दिया.... इसी प्रकार वह हर बार नयी चीजों से आकर्षित होता रहता और पुराने को छोड़ता जाता...,

    इस तरह उसकी काफी age बीत गई पर न तो वह paisa वाला बन पाया, न ही विद्वान, न संगीतज्ञ, न समाजसेवी और न ही एक नेता,       
एक दिन अपने कुछ न बन पाने के इस दुःख को उसने एक महात्मा को बताया, महात्मा ने उस कि बात सुन कर कहा-“ बेटा सारी दुनियाँ में तरह-तरह का आकर्षण भरा पड़ा है, तुम एक निश्चय करो कि तुम्हें क्या पाना है या बनना है और जीते जी उसी पर अमल करो, तुम्हारी उन्नति अवश्य होगी, कई जगह गड्ढ़े खोदोगे तो न पानी मिलेगा और न कुआँ बना पाओगे,”
    
युवक, महात्मा जी कि कही बात का संकेत समझ गया और फिर एकनिष्ठ भाव से एक लक्ष्य  निर्धारित कर, उसे प्राप्ति में लग गया,

                   
Note: The motivational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing it in my own way in Hindi language.


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