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मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

Talaas – Narendra Se Swami Vivekanand ki- A Motivational Article in Hindi




तलास- नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद की

Sad guru ki Tallas

Talaas – Narendra Se Swami Vivekanand Ki

बात उस समय की है जब Swami Vivekananda नरेंद्र के नाम से जाने जाते थे और वो ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक great teacher की तलाश में थे वो एक महान ज्ञानी की तलाश में थे, जो उनको सही direction दिखा सकें व जीवनोपयोग ज्ञान प्रदान करे, जिससे वो अपने जीवन पथ पर निरंतर (regular) उन्नति करते जाये

Vivekananda को बहुत से लोगों ने भिन्न – भिन्न गुरुओं के पास जाने की सलाह दी। और वो बहुत से teachers के पास गये पर उनको उनसे वो नहीं मिला, जिसकी उनको तलाश थी, वो उनसे संतुष्ट नहीं हुए ।

Vivekananda को learning (ज्ञान प्राप्ति की ) की इतनी प्यास थी की वो अपनी इस असफलता से  निराश नहीं हुए, और वो इस थका देने वाली अपनी खोज में continuously लगे रहे

तभी उनको किसी ने Swami Ramakrishna Param Hans के पास जाने की सलाह दी। विवेकानंद जी ने भी उनके बारे में बहुत – कुछ सुना था, इसलिए वो उनसे मिलने को व्याकुल हो उठे, पर स्वामी रामकृष्ण परमहंस किसी को अपना student आसानी से नहीं बनाते थे । और जिनको वो अपना student बनाते थे, उनका वो बहुत कठिन exam लेते थे । अत: उनका शिष्य बन पाना बहुत कठिन था ।

लेकिन विवेकानंद तो ज्ञान के प्यासे थे, इसलिए वो एक दिन स्वमी रामकृष्ण परमहंस के घर पहुँच ही गये । उन्होंने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी ने पूँछा “ कौन है ?” इस पर विवेकानंद जी ने बड़ी ही सहजता से answer दिया –“ यही तो जानने आया हूँ कि मैं कौन हूँ ।” विवेकानंद का answer सुनकर, स्वामी रामकृष्ण परमहंस खुश हो गए और उन्होंने बड़ी प्रसन्नता से विवेकानंद को अपना शिष्य बना लिया ।

एक great guru को पा कर, Vivekananda की तलाश जब पूर्ण हो गयी, तब जा कर उनके शिष्य मन को शान्ति मिली । और साथ ही ज्ञान प्राप्ति के मार्गों की talaas को एक नया आयाम । 


Friend’s, आप को मेरी तलास- नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद की” motivational story, Hindi में कैसी लगीक्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये   


शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

Inspirational Thoughts on God in Hindi



स्वामी विवेकनद के ईश्वर पर आधारित प्रेरणादायक विचार

great thinker and noble leader  

Inspirational Thoughts on God in Hindi

In Hindi - ईश्वर मुक्ति का स्वरूप है, प्रकृति का नियंता है । तुम उसे मानने से इनकार नहीं कर सकते हो, क्योकि तुम स्वतंत्रता के भाव के बिना न तो कोई कार्य कर सकते हो और न ही जी सकते हो।

In English- Salvation is God's nature; God is the controller of nature. You cannot refuse to obey him; because without the sense of freedom you can neither work nor can live.


In Hindi – ईसा मसीह के इन शब्दों का हमेशा स्मरण रखो – “ मांगो, वह तुम्हे मिलेगा; खोजो, तुम उसे पाओगे ; खटखटाओ और वह तुम्हारे लिए खुल जायेगा।” ये शब्द पूर्ण रूप से सत्य हैं , न तो ये आलंकारिक हैं न ही काल्पनिक।  

In English- Always remember these words of Jesus - "Ask, and it will get you; seek, you'll find him; knock and it shall be opened to you." These words are absolutely true; neither of these is figurative or imaginary.


In Hindi - कोई भी जीवन असफल नहीं हो सकता; संसार में असफल कही जाने वाली कोई वस्तु है ही नहीं। सैकड़ों बार मनुष्य को चोट पहुँच सकती है, हजारों बार वह पछाड़ खा सकता है, पर अन्त में वह यही अनुभव करेगा कि वह स्वयं ही ईश्वर है ।

In English- Any life cannot fail; there is no object in the world is called unsuccessful. Man could get hurt hundreds of times, thousands of times he might eat grass, but eventually he will understand that he himself is God's.


In Hindi - जीवन और मृत्यु में, सुख और दुःख में ईश्वर समान रूप से विद्यमान है । समस्त विश्व ईश्वर से पूर्ण है । अपने नेत्र खोलो और उसे देखो ।
In English- Life and death, happiness and sorrow, God is present equally. The world is full of God. Open your eyes and look at him.


In Hindi - एक विचार को ले लो । उसी एक विचार के अनुसार अपने जीवन को बनाओ; उसी को सोचो, उसी का स्वप्न देखो और उसी पर अवलंबित रहो । अपने मस्तिष्क, मासपेशियों, स्नायुओं और शरीर के प्रत्येक भाग को उसी विचार से ओत प्रोत होने दो और दूसरे सब विचारों को अपने से दूर रखो । यही सफलता का रास्ता है । यही वह मार्ग है, जिसने महान धार्मिक पुरषों का निर्माण किया है।  
  
In English- Take an idea. According to the idea, Make your life; think the same, look the same dream and be dependent on him. Your brain, muscles, nerves and other parts of the body imbued with the idea of having two and keep away from all other thoughts. That is the way of success. This is the path; who have built great religious men.      



Request- स्वामी विवेकानन्द जी के “Inspirational Thoughts on God in Hindi” विचारों का यह collection आप को कैसा लगा? क्या ये आप के जीवन में उपयोगी है ? please हमें ये comment के द्वरा जरुर बताने का कष्ट करें, और गर पसंद आये हो तो इनको share भी करें.. जिससे महापुरषों के सुविचारों कि ये खोज जारी रहे, और आप सब तक पहुँचती रहे।            

                 
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शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

Intrepidity-निडरता (Fearlessness)- real life motivational story in Hindi on Swami Vivekananda life


निडरता

निर्भीक संत

स्वामी विवेकानंद जी कि निर्भीकता से हम सब भली भांति परिचित है वो एक कर्मठ देशभक्त, समाजसेवी व great sage थे, ये सारे गुण उनको उनके गुरु श्रीरामकृषण परमहंस कि कृपा और उनके सानिध्य से प्राप्त हुए। स्वामी जी बचपन से ही निडर थे साथ ही उनमें जिद्दी पन भी बहुत था। वो जिस बात पे अड़ जाते उसको मनवा के ही रहते थे। इसके साथ ही उनमें  नेतृत्व का गुण भी बचपन से ही विदमान था.

बचपन में सब swami Vivekananda को नरेन्द्र के नाम से पुकारते थे,
नरेन्द्र को कभी किसी बात से डर नहीं लगता था या हम कहे कि डर उनको छू भी नहीं पता था चाहे भुत-प्रेत कि ही बात क्यों न हो.
नरेन्द्र के जीवन कि एक घटना है जो उनकी निर्भीकता का ये प्रमाण देती है कि वो बचपन से ही कितने निडर थे।  
  
नरेंद्र के घर के पड़ोस में एक घर था, उस घर में चंपा का एक पेड़ था. नरेंद्र अपने साथियों के साथ अक्सर यहाँ खेलने आ जाते और चम्पा के पेड़ पर चढ़ जाते और अपनी जांघों कि कैंची बना पेड़ कि डाल को पकड़ कर उल्टा झूलने लगते थे। एक दिन नरेन्द्र इसी तरह एक ऊँची डाल पे उल्टा लटक के झूला झूल रहे थे, बिलकुल चमगादड़ कि तरह।

घर के मालिक ने जब यह देखा तो डर गये कि बालक कही गिर न पड़े, और यदी यह बालक गिर पड़ा तो इसका सिर फट जायेगा, यह सोच कर वह कांप उठे।

इसलिए उन्होंने नरेन्द्र को डराने कि सोची और कहा- “ बेटा नरेंद्र! आगे से इस पेड़ पर मत चढ़ना, इस पेड़ पर एक ब्रह्म राक्षस (बड़ा प्रेत) रहता है जो बहुत विकराल है। जब कोई इस पेड़ पर चढ़ता है, तो वो नाराज हो जाता है और उसको बहुत क्रोध आ जाता है और फिर वो उन सब को मारता है ।”

नरेन्द्र चुप चाप उसकी बात को सुनते रहे, घर के मालिक ने नरेन्द्र को चुप देखा, तो समझा कि वह अब डर गये है और अब वह चम्पा के पेड़ पर इस तरह नहीं चढ़ेंगे। यह सोच कर वह वहां से घर के अंदर चले गये।
पर उनके जाते ही नरेन्द्र फिर चम्पा के tree पर चढ़ गये और अपने साथियों से बोले,” आज तो मैं इस ब्रह्म राक्षस को देखकर ही रहूँगा  कि वो कितना बड़ा है,” यह सुन, उनके साथी डर गये, और बोले- ‘ना बाबा वो हम सबको मर डालेगा।’

इस पर नरेन्द्र ने हँस कर कहा-“ अरे! ये सब बातें हम लोगों को डराने के लिए कही गई हैं । वास्तव में आज तक ब्रह्म राक्षस को किसी ने देखा भी हैं?     
          
                   

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गुरुवार, 29 अगस्त 2013

swami Vivekananda's motivational thoughts based on "Faith and Strength"



विश्वास और शक्ति

मेरे “page-3 in Hindi” के पहले लेख में मैं स्वामी विवेकानन्द जी के उन चुने हुए सद्वाक्यों एवं विचारों का collection ले कर आई हूँ जिनको उन्होंने विभिन्न विषयों पर विभिन्न समय और स्थान पर मानव जाति के कल्याण के लिए संसार के सम्मुख कहे थे



आज इस लेख के प्रथम भाग में मैने Swami Vivekananda जी के उन शक्ति- दायी विचारों का संग्रह किया है, जिन को उन्होंने मनुष्यों में विश्वास और शक्ति का जागरण करने के लिए अपने शिष्यों से उनके बीच कहे थे। ये विचार सिर्फ उनके शिष्यों में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण world के लोगों में विश्वास और शक्ति का जागरण कर रहे हैं।

स्वामी विवेकान्दजी के इन विचारों को मैनें उनके विभिन्न मठों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों से लिया है जिनको में बचपन से अपनी डायरी में लिखा करती थी, इसलिए इन पुस्तकों के नाम देने में मैं इस समय असमर्थ हूँ ,इस के लिए मुझे छमा करे।

विश्वास

Ø जो अपने आप में विश्वास नहीं करता, वो नास्तिक है। प्राचीन धर्मों ने कहा है, वह व्यक्ति नास्तिक है जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता। नया धर्म कहता है, वह  नास्तिक है जो अपने आप में विश्वास नहीं करता।

Ø विश्वास, विश्वास, अपने आप में विश्वास, ईश्वर में विश्वास- यही महानता का रहस्य है। यदी तुम पुराण के तैंतीस करोड़ देवताओं और विदेशियों द्वारा बतलाये हुए सब देवताओं में विश्वास करते हो, पर यदी अपने आप पे विश्वास नहीं करते, तो तुम्हारी मुक्ति नहीं हो सकती। अपने आप में विश्वास करो, उस पर स्थिर रहो और शक्तिशाली बनो।

Ø हम देख सकते हैं कि दो मनुष्यों के बीच अंतर होने का कारण उनका अपने आप में विश्वास होना ही है। अपने आप में विश्वास होने से सब कुछ हो सकता है। मैनें अपने जीवन में इसका अनुभव किया है, अब भी कर रहा हूँ और जैसे-जैसे मैं बड़ा होता जा रहा हूँ, मेरा विश्वास और भी मजबूत होता जा रहा है ।

Ø कोई भी जीवन असफल नहीं हो सकता; संसार में असफल कही जाने वाली कोई वस्तु है ही नहीं। सेकड़ों बार मनुष्य को चोट पहुँच सकती है, हजारों बार वह पछाड़ खा सकता है, पर अंत में वह यही अनुभव करेगा कि वह स्वयं ही ईश्वर है।

Ø तुम्हारी सहायता कौन करेगा? तुम स्वयं ही विश्व कि सहायता स्वरूप हो। इस विश्व कि कौन सी वस्तु तुम्हारी सहायता कर सकती है। तुम्हारी सहायता करने वाला मनुष्य, ईश्वर या प्रेतात्मा कहाँ है? तुम स्वयं ही विश्व के रचियता भगवान हो, तुम किस से सहायता लोगे ? सहायता और कहीं से नहीं, पर अपने आप से ही मिलती है और मिलेगी। अपनी अज्ञानता कि स्थिति में तुमने जितनी प्रार्थना कि और उसका तुम्हे जो उत्तर प्राप्त हुआ, उसे तुम समझते रहे कि वह उत्तर किसी और व्यक्ति ने दिया है, पर वास्तव में तुम्हीं ने अनजाने में उन प्रार्थनाओं का उत्तर दिया है।  


Request- स्वामी विवेकानन्द जी के “स्वयं पर-विश्वास” विचारों का यह collection आप को कैसा लगा? क्या ये आप के जीवन में उपयोगी है ? please हमें ये comment के द्वरा जरुर बताने का कष्ट करें, और गर पसंद आये हो तो इनको share भी करें.. जिससे महापुरषों के सुविचारों कि ये खोज जारी रहे, और आप सब तक पहुँचती रहे।                             
            
   
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