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सोमवार, 9 दिसंबर 2013

Do their own job by yourself- A inspirational real life story in Hindi-


अपना काम स्वयं करें
Do their own job by yourself 
Do their own job by yourself

very famous शिक्षाविद ईश्वर चन्द्र विद्या सागर के अस्तित्व से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं और जो आज कि युवा पीढ़ी इन्हें नहीं जानती उनके लिए ये विशेष article है जो उनके विशेष अस्तित्व का परिचय हम युवाओं को कराती है साथ में उनका जीवन हमे जीने कि नयी राह और प्रेरणा देता है ।

ईश्वर चन्द्र विद्या सागर का अस्तित्व love, त्याग, परोपकार, न्यायप्रियता, क्षमा शीलता से परिपूर्ण था । उनके जीवन से जुड़े अनेकों ऐसे किस्से – कहानियाँ है जो उनके इन गुणों से हमें अवगत कराती हैं ।

एक बार की बात है, ईश्वर चन्द्र विद्या सागर कलकत्ता के रेलवे स्टेशन पर थे । तभी स्टेशन पर एक ट्रेन आ कर रुकी, उस में से एक नव युवक उतरा । वह देखने में एक student लग रहा था । गाड़ी से उतरते ही वो कुली को पुकारने लगा – कुली –कुली । जबकि उसके पास इतना ही सामान था कि वो उसे आसानी से अकेले ले कर चल सकता था । फिर भी उसे कुली चाहिए था ।

तभी एक उस लड़के के पास एक सीधा – सादा व्यक्ति आता है । वो उस लड़के से आकर पूछता है की कहाँ जाना है और ये पूछते हुए उस लड़के से सामान ले कर उसे उठा लिया ।

लड़का एक student था और वो एक school में training के लिए जा रहा था इसलिए उसने उस school का पता उस man को बता दिया । वो आदमी उसका सामान ले कर उस school चल दिया जो कि वही पास में था । वो जल्दी ही school पहुँच गये । जब वो आदमी सामान रख कर चल दिया, तो लड़के ने उस आदमी को कुछ rupees इनाम में देने चाहे ।

तब सामान उठाने वाले आदमी ने कहा –“ मुझे कोई इनाम नहीं चाहिए । बस अपना काम स्वयं करने की कोशिश करें, यही मेरा इनाम है ।” इतना कहकर वह आदमी वहां से चला गया ।

अगले दिन जब वह लड़का college पंहुचा, तो प्रार्थना स्थल (assembly) पर उसने उसी आदमी को देखा, जो yesterday उसका सामान उठा के college  लाया था । वह आदमी उस समय वहां principal के उच्चासन पर विराजमान था। यह देख वह लड़का बड़ा शर्मिन्दा हुआ ।

prayer के बाद जब सब students अपनी – अपनी class में चले गये तब उसने principal  के चरणों में अपना sir रख कर माफ़ी माँगी ।

तब उन principal  ने जो की ईश्वर चन्द्र विद्या सागर थे, उस लड़के से बोले –“ my son! जो किसी भी कार्य को छोटा नहीं समझते और अपना कार्य स्वयं करते हैं, वो ही जीवन में उन्नति के शिखर पर चल सकते हैं ।” और ये उदाहरण ईश्वर चन्द्र विद्या सागर ने स्वयं उस student का सामान उठा कर दिया और अपना काम स्वयं करने की प्रेरणा दी ।

इतने साधु व्यवहार के और Sacrifice, benevolence, justice, forgiveness जैसे पवित्र गुणों को धारण करने वाले व्यक्ति थे ईश्वर चन्द्र विद्या सागर । ऐसे लोग आज के time पर देखने तक को भी नहीं मिलते जो स्वयं के आचरण से किसी को शिक्षित कर सके ।                     



Friend’s, आप को ये “Do their own job by yourself” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 


One Request: Did you like this personal development base motivational story in Hindi? If yes, become a fan of this blog...please

अंत में आप सब readers को मेरा धन्यवाद!  



रविवार, 11 अगस्त 2013

Great Beneficence ( Ishwarchandra Vidya Sagar- A motivational Story in Hindi)/उपकार


उपकार
( ईश्वरचंद्र विद्या सागर- एक उपकार से जीवन बदल दिया )

ऐसे  उपकारी जो जीवन को नयी दिशा दे .
  ईश्वरचंद्र विद्या सागर एक बार कहीं जा रहे थे, रास्ते में एक लड़का भीख मांग रहा था, उस लड़के ने ईश्वरचंद्र विद्या सागर जी से एक पैसा माँगा,
ईश्वरचंद्र जी ने उस लड़के से पूछा- “ तुम एक पैसे का क्या करोगे ?”
लड़के ने कहा- “ साहब, मैं इस एक पैसे से अपना पेट भरूँगा,”
ईश्वरचंद्र जी ने फिर पूछा- “ यदी में तुम को दो पैसे दूँ तो ?”
लड़के ने तब उत्तर दिया-“ तब, मैं एक पैसे से अपना पेट भरूँगा, और जो एक पैसा मेरे पास बचेगा, उससे मैं अपनी बूढी माँ के लिए चने ले जाऊंगा,”
ईश्वरचंद्र जी ने पुनः उससे पूछा- “ तुम्हें एक रुपया दूँ तो ?”
इसपे लड़के ने कहा-“ साहब! तब तो मैं थोड़ा सामान खरीदूँगा और उसे बाजार में जा के बेचूँगा, धीरे-धीरे करके मैं अपने पैरों पे खड़ा हो जाऊंगा, मुझे अपनी रोजी-रोटी के लिए फिर किसी पे निर्भर नहीं रहना होगा, और ईश्वर को धन्यवाद दूँगा,”
ईश्वरचंद्र विद्या सागर जी ने बड़ी प्रसन्नता के साथ उस लड़के को एक रुपया दे दिया, उनदिनों एक रूपये कि बहुत-बड़ी कीमत होती थी,
कुछ समय बाद वही लड़का ईश्वरचंद्र जी को दुबारा दिखा, वह एक छोटी सी दुकान पे बैठा था, ये दुकान उसकी खुद कि थी ,उस एक रूपये से जो ईश्वरचंद्र ने उसे दिए थे,
ईश्वरचंद्र जी को देखते ही लड़का तुरन्त दुकान से बाहर आया और उनके पैरों पे गिर पड़ा, लड़के कि आखों में श्रद्धा के आसूं थे, वो रुंधे हुवे गले से ईश्वरचंद्र जी से बोला –“ साहब! आपके उपकार ने मेरा जीवन बदल दिया, मेरा भीख मांगना सदा के लिए छूट गया, मैं भी इस समाज का एक अच्छा नागरिक बन गया,”
ईश्वरचंद्र जी ने उस लड़के को गले लगा लिया और उससे बोले- “बेटा तुम भी सदा ऐसे ही दूसरों कि सहायता करना,”
            

     Note: This motivational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing it in my own way in Hindi language.
   

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