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शनिवार, 7 सितंबर 2013

Microsoft word- shortcut keys in Hindi

नीचे Microsoft word में यूज़ होने वाली सभी प्रमुख shortcut keys की एक सूची दी जा रही है । जिनकी meaning Hindi और Enghlish दोनों भाषा में दी जा रही है ।

Shortcuts 
                    
Ctrl + A   
Select all contents of the page.
एक पेज की सभी सामग्री का एक साथ चयन करना

Ctrl + B                         
Highlighted bold selection.
बोल्ड प्रकाश डाला चयन

Ctrl + C                  
Copy selected text.
चयनित पाठ को कॉपी करना

Ctrl + X     
Cut selected text
चयनित पाठ काटें

Ctrl + N    
Open New / blank document 
नया / रिक्त दस्तावेज़ खोलें    
       
Ctrl + O
open option
ओपन विकल्प  

Ctrl + F            
Open find box
बॉक्स खोजने खोलें  
  
Ctrl + I            
Italic highlighted selection
प्रकाश डाला चयन इटैलिक

Ctrl + P                  
Open the print window
प्रिंट विंडो खोलें

Ctrl + K     
Insert link
लिंक डालें

Ctrl + U
Underline highlighted selection
प्रकाश डाला चयन रेखांकन

Ctrl + V                  
चिपकाएं

Ctrl + Y
Redo the last action performed   
प्रदर्शन अंतिम क्रिया फिर से करें

Ctrl + Z                         
Undo last action.
अंतिम क्रिया पूर्ववत्

Ctrl + G    
Find and replace option
विकल्प खोजें और बदलें

Ctrl + J     
Aligns the selected text or line to justify the screen.
पैरा संरेखण का दोनों ओर मिलान

Ctrl + L
Aligns the line or selected text to the left of the screen.                     
बाईं ओर चयनित पाठ या लाइन संरेखित

Ctrl + Q
Aligns selected paragraph to the left
बाईं ओर चयनित अनुच्छेद संरेखित

Ctrl + R
Aligns the line or selected text to the right of the screen.
स्क्रीन के दाईं ओर लाइन या चयनित पाठ संरेखित करता है.

Ctrl + Shift + L
Quickly create a bullet point.
जल्दी से एक बुलेट बिंदु बना.

Ctrl + Shift + F
Change the font
फ़ॉन्ट बदलें

Ctrl + Shift + >
Increase selected font +1pts up to 12pt and then increases font +2pts.
बढ़ाएँ 12pt फ़ॉन्ट 1 अंक ऊपर चयनित और तब फ़ॉन्ट 2 अंक बढ़ जाती है.

Ctrl +]
Increase selected font +1pts.
चयनित फ़ॉन्ट 1 अंक बढ़ाएँ.

Ctrl + Shift + <
Decrease selected font -1pts if 12pt or lower, if above 12 decreases font by +2pt.
यदि फ़ॉन्ट 1pts चयनित घटाएँ 12pt या कम, 2 पीटी द्वारा 12 घटने फ़ॉन्ट ऊपर है.


Ctrl + [
Decrease selected font -1pts.
फ़ॉन्ट 1pts चयनित घटाएँ.

Ctrl + <left arrow>
Moves one word to the left.
बाईं ओर एक शब्द चलता है.

Ctrl + <right arrow>
Moves one word to the right.
दाईं ओर एक शब्द चलता है.

Ctrl + Del
Deletes word to right of cursor.
कर्सर के अधिकार को हटाता शब्द.

Ctrl + Backspace
Deletes word to left of cursor.
कर्सर की हटाता शब्द छोड़ दिया.

Ctrl + End
Moves the cursor to the end of the document.
दस्तावेज़ का अंत करने के लिए कर्सर ले जाता है.

Ctrl + Home
Moves the cursor to the beginning of the document.
दस्तावेज की शुरुआत करने के लिए कर्सर ले जाता है.

Ctrl + Space bar
Reset highlighted text to the default font.
डिफ़ॉल्ट फ़ॉन्ट के लिए डाला पाठ रीसेट.

Ctrl + Shift + F12

Prints the document.
दस्तावेजों को मुद्रित करता है



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शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

A lioness mother - who gave the males - Rattan to Nation- a motivational story in Hindi




एक सिंहनी माँ- जिसने नर-रत्न दिया राष्ट्र को

एक नर -रत्न  

महाराणा प्रताप कौन थे..? आप का जवाब होगा king ? ये हम सब जानते है, कि महाराणा प्रताप एक राजपूत राजा थे  और महाराणा प्रताप के पिता महाराणा उदयसिंह थे पर उनकी माता कौन थी, कैसी थी, कहाँ से आयी थी ? जिन्होंने महाराणा प्रताप जैसे शेर को जन्म दिया यह जानकारी बहुत ही कम और विरले लोगों को ही पता है

एक बार कि बात है, महाराणा प्रताप के पिता महाराणा उदय सिंह अरावली कि दुर्गम घाटियों में निराश भटक रहे थे, कि उन्होने देखा कि एक farmer girl सिर पर बड़ी सी टोकरी लिए आ रही है । उसमें रोटी, दाल, और खेती के औजार आदि थे । दूसरे हाथ से सात – आठ बछड़े एक ही रस्सी से पकड़े थी । चारे पर अजब सा अनूठा ओज (light) था । उसने  पास आ कर महाराणा को इस स्थित में देखा तो साथ चलने को कहा । उसका house अरावली कि hills के बीच था । उस कन्या ने महाराणा को अपने पिता से मिलवाया । किसान ने अपनी daughter के साथ आये king को पहचान लिया । और उनका आदर सत्कार किया । उनको पानी पिलाया और रोटी खिलाई । अब तक वो कन्या अपने आचरण से राजा कि आत्मा को छु गई थी। राणाप्रताप अभी तक अविवाहित थे। उन्होंने great farmer से उनकी daughter का हाथ मांग लिया । क्योंकि राजा ने अब तक यह देख किया था कि वह कन्या एक सिंहनी के समान है और उसकी कोख (womb) से एक सिंह ही पैदा होगा ।

किसान ने राजा से कहा –“ मेरी क्या हैसियत है- आप कहाँ, और हम कहाँ! इस पर महाराणा ने किसान को समझाया और छोटे बड़े का भेद मिटा कर उस कन्या से marriage कर ली। रानी जैसी उर्जावान व सुयोग संगनी पाकर राजा धन्य हो गये । और रानी के साथ मिल कर पुनः पूरे जोश-होश व उत्साह से आरावली कि पर्वत श्रेणीयों के बीचों बीच उदयपुर नगर कि नींव डाली और अपने राज्य को पुनः सुव्यवस्थित किया । इस रानी ने ही अपनी कोख से नर – रत्न महाराणा प्रताप को जन्म दिया । रानी ने बड़े मन व श्रद्धा से उन्हें गढ़ा व वैसा ही बनाया जैसे कि उन दिनों राष्ट्र को एक सिंह समान राज पुत्र कि जरुरत थी । ऐसी ही सिंहनी जैसी माता अपनी कोख से राष्ट्र निर्माता को जन्म देती है ।    


Friend’s, आप को मेरी, “एक सिंहनी माँ- जिसने नर-रत्न दिया राष्ट्र को” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personalty) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये ।   


One Request: Did you like this personal development base motivational story in Hindi? If yes, become a fan of this blog...please

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Who is more important - spirit, mind or body?- it is a inspirational thoughts in Hindi-(किसका महत्व ज्यादा- भावना, बुद्धि या शरीर ?)


किसका महत्व ज्यादा- भावना, बुद्धि या शरीर ?

spirit, mind, or body

एक बार भावना, बुद्धि और शरीर तीनो आपस में मस्ती मजाक कर रहे थे , और हँसी मजाक करते- करते अचानक उनमें आपस में बहस छिड़ गयी कि उनमें कौन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है ? शरीर ने कहा- “ मैं मनुष्य के अस्तित्व का प्रतीक हूँ । मुझ से ही मनुष्य कि पहचान होती है । यदी मैं न होता तो मनुष्य अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं कर पता और ना ही अपनी भावनाओं को प्रकट कर पाता । मेरे ही माध्यम से आप दोनों स्वयं को दुनिया के सामने प्रकट कर पाते हो मेरे बिना आप दोनों का कोई अस्तित्व ही नहीं है इसलिए मैं आप दोनों से ज्यादा महत्वपूर्ण हूँ ।“

इस पर बुद्धि बोली - “ मेरे ना होने से मनुष्य पुर्णतः बेकार हो जायेगा उसका जीवन जीव- जंतु व जानवरों से जरा सा भी भिन्न नहीं होगा । उसके आचरण और जानवरों के आचरण में कोई अंतर नहीं होगा । मनुष्य ने जो भी प्रगति कि है मेरे कारण कि है मेरे बीबा वह विकास के साधन नहीं बना सकता मेरे बिना तो विकास ही असंभव है। मेरे अस्तित्व से ही मनुष्य का विकास संभव है मेरे बिना ये सब मूल्य हीन है ।”

शरीर और बुद्धि कि बातों को सुन कर भावना बोली –“ मनुष्य के जीवन में संस्कार, समृद्धि, विकास और सुंदरता ये सब भावनावों के कारण हैं । भावनाओं के आभाव में मनुष्य और जड़ पदार्थों ( ईट – पत्थर) में क्या अंतर रह जायेगा ? इसलिए आप सब में मैं ही सब से ज्यादा महत्वपूर्ण हूँ।"

शरीर, बुद्धि और भावना के इस वार्त्तालाप को छीर – सागर में बैठे सच्चिदानंद God Vishnu सुन रहे थे । प्रभु सम्पूर्ण वार्त्तालाप को सुन कर मुस्कुरा उठे और उन तीनों से बोले –“ मनुष्य का जीवन तुम तीनों के बिना अधूरा है । तुम तीनों के कारण ही मनुष्य जीवन बहुमूल्य बनता है । तुम में से किसी एक के भी ना होने से उस के जीवन में असंतुल आ जाएगा । वो अपना न तो विकास कर पायेगा न अपने अस्तित्व का बरकरार रख पायेगा । मैंने मनुष्य को अतुल्य शरीर, प्रखर और असीम बुद्धि, और अनंत भावनाएँ दी हैं । जिससे वह तुम सब में  समुचित संतुलन बना कर, तुम तीनों का अपने जीवन में समग्र व उचित उपयोग कर अपने जीवन को उन्नत कर सके । तुम तीनों ही उसे जीवन में वरदान हो ।”


Friend’s, आप को मेरी, “किसका महत्व ज्यादा- भावना, बुद्धि या शरीर?” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personalty) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये ।   


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गुरुवार, 5 सितंबर 2013

Where tenth- this is a motivational story in Hindi



दसवाँ कहाँ गया

एक बार ten men एक गाँव से दूसरे गाँव पैदल जा रहे थे रास्ते में उन्हें एक नदी पार करनी पड़ी । वे सब एक - एक कर के नदी पार करने लगे । फिर नदी के उस पार पुच कर सब एक साथ एकत्रित हो गये । फिर यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी दस लोग है कि नहीं जो साथ में चले थे, और वे सब के सब सही सलामत river के इस पार आ गये कि नहीं । उनने एक – दूसरे को Count करना शुरू किया ।

उनमें से एक व्यक्ति ने सब कि गिनती करनी शुरू की और Count करने में नौ लोग हुए, और बोला हमारा एक साथी कम है ।

फिर दूसरे व्यक्ति ने पुनः गिनती कि पर फिर एक व्यक्ति कम पड़ गया । इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति ने गिनती कि पर हर बार केवल नौ लोग ही निकलते । प्रत्येक व्यक्ति नौ लोगों को गिनता और अपने आप को छोड़ देता । वे सभी लोग व्याकुल हो उठे कि हमारा एक साथी कहाँ गया और दसवें साथी के दुःख में सभी रोने लगे ।

तभी एक wise man वहाँ से गुजर रहा था । उनको रोते हुए देखा तो उनसे पूछा, “मेरे प्रिय मित्रों, आप सब लोग क्यों रो रहे हैं ?” उन्होंने उत्तर दिया- “ हम दस साथी थे परन्तु अब हम नौ हैं, हमारा एक साथी river पार करने में कहीं.. कम हो गया ।”

mage man ने देखा कि वे सब ten ही थे तो उसने उन सब को एक पंक्ति में खड़ा करके गिनने को कहा । फिर एक वक्ती ने उनको गिनना start किया और पुनः nine पे आ के रुक गया इस पर उस wise man ने कहा ,” दसवें तुम स्वयं हो ।” दशवें के मिल जाने पर सबों ने खुशियाँ मनायी और God को thanks कहा।

इसी प्रकार हम सब भी अक्सर खुद को भूल जाते हैं और औरों को याद रखते हैं कभी स्वयं के महत्व को मत भूलो ।

     इस कहानी के दस मित्रों की तरह ही हमारे जीवन में भी दस मित्र हैं जिनको संसार रूपी नदी को पार करना है पर ध्यान रहे कि कही हम अपने दसवे मित्र को विसरा न दें । हमारी five इन्द्रियां और four आन्तरिक शक्तियाँ (मन , बुद्धि, स्मृति और अहं) सभी विलाप करती हैं जब वे आत्मा (soul) से दूर हो जाती हैं। फिर जब great sage आते हैं और तुमको तुम्हें ही दिखाते हैं कि तुम ही दशम हो!

मित्रों आप भी, गिनती करो, लेकिन तब तक रुकना मत जब तक दसवां  मिल ना जाये ।
        


Friend’s, आप को मेरी, “दसवाँ कहाँ गया” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personalty) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 


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The Mystery of Nature - Rebirth of a village


प्रकृति का अजब खेल- एक गाँव का पुनर्जन्म


The Mystery
प्रकृति का तांडव 


प्रकृति के भी खेल भी कितने निराले हैं वो कब क्या करे, क्या दे, क्या ले ले ये कोई न नहीं जनता है जब प्रकृति खुश होती है तो, प्रकृति की कृपा की जहाँ कोई अंत नहीं है वही उसकी नाराजगी कि मार की भी कोई सीमा नहीं है। प्रकृति जब खुश होती है तो चारो तरफ हरियाली, संपन्नता और खुशहाली लाती है तो वही पर जब वह नाराज होती है तब वो तूफान लाती है, भूकंप, चक्रवात, सुखा आदि से सम्पूर्ण विनाश करती है।

पर कभी- कभी प्रकृति के गर्त से कुछ ऐसी घटना घटती है जिस पर सामान्य बुद्धि विश्वास नहीं कर पाती और बस प्रकृति कि अपार शक्ति व अदभुत्ता को देखती रह जाती है ।

ऐसी ही एक घटना पुनर्जन्म कि है। हम लोगों ने अब तक इंसानों के पुर्जन्म कि बात सुनते आये है पर क्या कभी आप ने किसी ख़तम और बर्बाद हुए गाँव के पुनर्जन्म के बारे में सुना है... नहीं ना, पर यहाँ पर आप और हमको इस बात पर विश्वास करना ही होगा क्योंकि इस बात के साक्ष्य जो मौजूद हैं । ये साक्ष्य चीन कि धरती पर मौजूद हैं ।

बात चीन के सिचुआन प्रान्त के शुआनफिंग गाँव कि है। इस गाँव में five year पहले 2008 में nature ने तांडव किया, कि गाँव में 8 degree कि तीव्रता से आये भूकंप से यहाँ कि धरती फटी और इस गाँव का नामों निशां चीन के मानचित्र से मिट गया और इस स्थान पर एक झील ने अपना नाम दर्ज करा लिया । इस गाँव का हर घर-स्कूल जल समाधि बन गया।

लेकिन इस साल July में, चीन में आई nature की दूसरी विपदा ने इस गाँव पर अपनी कृपा कर दी। जो गाँव बाढ़ से ख़तम हो गया था । वो इस साल आई 50 साल की सबसे भयानक बाढ़ से पुनः अस्तित्व में आ गया। बाढ़ ने झील के किनारों को तोड़ दिया। इससे झील का water बाहर आ गया और गाँव के मकान फिर से दिखने लगे । इस अदभुत प्राकृतिक घटना ने जहाँ एक ओर चीन में भयंकर विनाश लीला रची, वहीँ प्रकृति की ये आपदा, शुआनफिंग गाँव के लिए वरदान साबित हुई। प्रकृति ने इस गाँव पर अपनी कृपा का आशीर्वाद दे कर इसे नव जीवन प्रदान किया और ये गाँव दुनिया के मानचित्र पर पुनः पुनर्जीवित हो उठा।    

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