Monday, 29 July 2013

Competition between Sparrow and vulture (गौरेया और गिद्ध में प्रतियोगिता)



गौरेया और  गिद्ध में प्रतियोगिता
Competition between Sparrow and vulture

winner in life
एक बार छोटी सी गौरेया और बड़े गिद्ध में प्रतियोगिता तय हुई/ निश्चय हुआ कि जो सबसे ऊंचाई तक पहुँचेगा वो ही विजेता होगा/

प्रतियोगिता प्रारंभ हुईगौरेया फुर्र-फुर्र करती हुई ऊपर उठने लगी तो उसे दो कीड़े दिखाई पड़े, जो गिरते हुए नीचे रहे था / गौरेया ने उन दोनों को भी अपने साथ ले लिया और धीरे- धीरे ऊपर जाने लगी /
इधर इतनी देर में गिद्ध बहुत ऊँचा पहुँच चूका था, पर तभी उसे सड़ी हुई लाश दिखाई पड़ी और वह प्रतियोगीता भूलकर लाश खाने जा बैठा, और गौरेया प्रतियोगिता जीत गई /

            थोड़ी दूर पे एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे यह घटना देख रहे  थे, वो शिष्यों से बोलेऊँचे उठे फिर ना गिरे, यही मनुज को कर्म/ औरन ले ऊपर उठे, इससे बड़ों धर्म/”

Saint ने जो कहा वो सच में हम मनुष्यों के जीवन का भी सबसे बड़ा सच है, truth यही है जब एक सामान्य व्यक्ति जीवन कि प्रत्येक पथ पे उपलब्धि और उचाईयों को प्राप्त कर चुका हो और जब अचानक उसके जीवन में पतन होने लगे तब उसके कुकर्म ही उसके जिम्मेदार होते हैवही पे जो व्यक्ति हमेशा धीरे-धीरे शांति से धर्मपथ पर चलते हुए अपने साथ औरों को भी आगे ले चलता है वो जीवन के हर पथ पे ऊंचाईयों को पाने में सफल होता है/            




            Note: The motivational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing it in my own way in Hindi.


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